A2Z सभी खबर सभी जिले की

सिद्धार्थनगर में SIR नोटिस विवाद पर सियासी टकराव

BJP नेता ने सपा प्रदेश सचिव से कहा-गवर्नर हो गए हो, दो मिनट में सुधर जाओगे

सिद्धार्थनगर में डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के भनवापुर ब्लॉक के महतिनिया खुर्द गांव में एसआईआर (SIR) नोटिस वितरण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। गांव के करीब 250 लोगों को तीसरे चरण में एसआईआर नोटिस जारी हुए थे।

ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित बीएलओ द्वारा नोटिस समय पर वितरित नहीं किए गए, जिससे कई लोग प्रक्रिया को लेकर असमंजस में रहे।

शिकायत के बाद बढ़ा मामला

ग्रामीणों की शिकायत समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव रामफेर उर्फ अंशू यादव तक पहुंची। बताया जा रहा है कि उन्होंने संबंधित बीएलओ सुदामा यादव को फोन कर नोटिस तत्काल वितरित करने को कहा। रामफेर यादव का कहना है कि उन्होंने केवल ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत बात की थी, ताकि कोई पात्र व्यक्ति नोटिस से वंचित न रह जाए।

पढ़िए ऑडियो में क्या कहा…

इसी बीच भारतीय जनता पार्टी से जुड़े नेता व ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि लवकुश ओझा का नाम सामने आया। सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित ऑडियो में दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक सुनाई दे रही है। हालांकि, इस ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

ऑडियो में लवकुश ओझा यह कहते सुनाई देते हैं, तुम उल्टा-सीधा क्यों बात कर रहे थे बीएलओ से? मैं जान ही नहीं पाया कौन बात कर रहा है, नहीं तो मैं घुस जाता।

इस पर रामफेर यादव का कथित जवाब है, मैंने तो सिर्फ नोटिस बांटने को कहा था, क्या दलित और पिछड़े लोग नहीं जिएंगे?

इसके बाद बातचीत और उग्र हो जाती है। ऑडियो में कथित तौर पर यह भी सुनाई देता है,

“नौटंकी करोगे तो घिर्रा के मारूंगा, दिमाग सही हो जाएगा तुम्हारा।”

जिस पर जवाब आता है, मार दीजिए तो मार दीजिए। साथ ही कथित तौर पर यह भी कहा गया, “गवर्नर हो गए हो क्या? दो मिनट में निकाल लेंगे… एक मिनट में सुधर जाओगे, सारी नौटंकी निकाल दूंगा।

रामफेर यादव का आरोप है कि उन्हें फोन पर अभद्र भाषा का

प्रयोग कर धमकाया गया। उनका कहना है कि उन्होंने केवल ग्रामीणों की समस्या उठाई थी और इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत बताया है।

वहीं लवकुश ओझा का कहना है कि बीएलओ को अनावश्यक दबाव में लिया जा रहा था। भाजपा समर्थकों का दावा है कि बातचीत को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया है, जबकि सपा कार्यकर्ता इसे जनप्रतिनिधि के अपमान और धमकी का मामला बता रहे हैं। विवाद एसआईआर नोटिस वितरण से जुड़ा था।

Back to top button
error: Content is protected !!